Budget 2020: जब बजट भाषण में मनमोहन सिंह ने कहा-देश का कर्ज कभी चुकता नहीं कर पाऊंगा – when manmohan singh said, this is a debt which i can never be able to fully repay

Published By Sudhanshu Kumar | इकनॉमिक टाइम्स | Updated:

हाइलाइट्स

  • 1991 का बजट भाषण ऐसा था जिसमें परंपरा से हटकर कुछ दिखा
  • इसके केंद्र में वित्त मंत्री मनमोहन सिंह थे जिन्हें भारत के सबसे धीर-गंभीर राजनीतिज्ञों में से एक
  • तत्कालीन वित्त मंत्री मनमोहन सिंह ने अपने जीवन से जुड़ी भावुक बातें साझा कीं

नई दिल्ली

बजट के दौरान दिया जाने वाला भाषण बेहद गंभीर होता है और इसमें शायद ही आपने किसी वित्त मंत्री के जीवन में आगे बढ़ने की कहानी सुनी होगी। हमारे देश के बजट भाषण में चुटीली टिप्पणियां, हाजिरजवाबी और शायरी खूब इस्तेमाल में लाए जाते हैं। लेकिन देश में हुए तमाम बजट भाषण में एक भाषण ऐसा भी था, जब उसमें परंपरा से हटकर कुछ दिखा। इसके केंद्र में वित्त मंत्री मनमोहन सिंह थे, जिन्हें भारत के सबसे धीर-गंभीर राजनीतिज्ञों में से एक माना जाता है।

साल 1991 में तत्कालीन वित्त मंत्री मनमोहन सिंह द्वारा दिया गया बजट भाषण कई मायनों में लीक से हटकर था। इस भाषण ने भारत को बदलकर रख दिया, जो उदारीकरण के नाम से जाना जाता है। इसने आयात को आसान किया, विदेशी निवेश की मंजूरी दी और भारी घाटे में चल रही सरकारी कंपनियों में विनिवेश का मार्ग प्रशस्त किया। सबसे अहम बात यह है कि इससे कुख्यात लाइसेंस-परमिट राज खत्म हो गया।

1991 का बजट भाषण डॉ. मनमोहन सिंह के लिए इस मायने में भी महत्वपूर्ण है कि बेहद कम बोलने वाले सिंह ने अपने निजी जीवन से जुड़ी बेहद भावुक बातें कही थीं।

उन्होंने अपने भाषण में कहा, ‘मैं हर साल सूखे का कहर झेलने वाले गांव के एक गरीब परिवार में पैदा हुआ था। वह गांव अब पाकिस्तान का हिस्सा है। यूनिवर्सिटी में मिलने वाले स्कॉलरशिप और अनुदान के कारण मैं भारत में कॉलेज में पढ़ सका और उसके बाद इंग्लैंड जा पाया। इस देश ने मुझे बेहद अहम विभागों का कार्यभार सौंपकर मुझे सम्मानित किया है। यह वह कर्ज है, जिसे मैं कभी चुकता नहीं कर पाऊंगा।’

हिंदी में बजट (Budget news in Hindi) की ताज़ा खबरें आप पढ़ सकते हैं। यहां आप 2020 में पेश किए जाने वाले बजट (Budget 2020) से जुड़ीं खबरें (Budget News) पढ़ पाएंगे।

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